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तेरी यादों को मेरे दिल से न मिटा पाया कोई।

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नज़रें आज भी ढूँढती हैं मोहब्बत कहीं,
        
                                                    
                            
तेरे जैसा हसीं ज़माने में कहाँ मिला कोई।

हमने हर शख़्स में तेरा अक्स तलाशा मगर,
दिल को तेरे सिवा और कहाँ भाया कोई।

वो तेरी बात में ठहराव, वो आँखों की चमक,
फिर न महफ़िल में ऐसा चेहरा नज़र आया कोई।

इश्क़ करते हैं तो अंजाम से डरते क्यों हैं,
दिल ने जब चाहा तो फिर होश कहाँ रहा कोई।

तेरी ख़ामोश निगाहों का असर ऐसा हुआ,
लफ़्ज़ होंठों पे रहे और न कह पाया कोई।

हमने माना कि बहुत लोग हैं दुनिया में मगर,
मेरी दुनिया में तेरे जैसा न समाया कोई।

वक़्त ने लाख मिटाने की कोशिश की मगर,
तेरी यादों को मेरे दिल से न मिटा पाया कोई।
— विकास त्रिपाठी ‘विक्की’
एक महीने पहले
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