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ख़ामोशी भी कह जाती है

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम कुछ मत बोलो, मैं हर बात समझ जाता हूँ,
        
                                                    
                            
तुम्हारी ख़ामोशी में छुपे जज़्बात समझ जाता हूँ।

तुम्हारे लफ़्ज़ मोती बनकर बिखरें उससे पहले,
मैं तुम्हारी आँखों के सवालात समझ जाता हूँ।

तुम मुस्कुराकर दर्द छुपाने की कोशिश करती हो,
मैं उस मुस्कान के पीछे की बात समझ जाता हूँ।

तुम कहती नहीं कि दिल में क्या गुज़रती है,
मैं धड़कनों की हर एक आहट समझ जाता हूँ।

तुम्हारी पलकों का यूँ अचानक झुक जाना,
मैं उसमें छुपी मोहब्बत की शुरुआत समझ जाता हूँ।

तुम दूर रहकर भी जब याद करती हो मुझे,
मैं हवाओं में घुली वो मुलाक़ात समझ जाता हूँ।

तुम्हें डर है कि कहीं राज़ खुल न जाए तुम्हारा,
मैं तुम्हारी हर छुपी हुई बात समझ जाता हूँ।

तुम कुछ मत बोलो, मैं हर बात समझ जाता हूँ,
तुम्हारे दिल के अनकहे एहसास समझ जाता हूँ।
23 घंटे पहले
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