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बारह महीने तेरा सपना

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन के सूने आँगन में,
        
                                                    
                            
जागा मीठा ख़्वाब।
तू आए तो ज़िंदगी,
महके बेहिसाब।
बारह मास ये मन सोचे,
सपना कैसे साकार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

जनवरी की नरम धूप में,
उड़ें पतंगें साथ।
तेरी डोर सँभालूँ मैं,
तू कहना मन की बात।
खुले गगन में अपना भी,
सपना इक साकार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

फरवरी में फूल खिलें,
महके घर की डाल।
पीली सरसों देखकर,
मन हो जाए निहाल।
तेरे आने से जीवन,
बसंत की बहार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

मार्च बजे जब ढोल कहीं,
होली लाए रंग।
तू हँसना उस ओर खड़ी,
मैं मुसकाऊँ संग।
तेरी निर्मल हँसी स्वयं,
रंगों का शृंगार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

अप्रैल की नरम धूप में,
देखूँ तेरा रूप।
तेरी बातें छाँव बनें,
हल्की हो हर धूप।
तेरी सादी मुसकान ही,
जीवन का आधार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

मई की गरम दुपहरी में,
ढूँढ़ें ठंडी शाम।
बातों में दिन ढल जाए,
मन दोहराए नाम।
छोटी-छोटी खुशियों से,
जीवन इक उपहार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

जून घटा जब घिर आए,
पवन सुनाए गीत।
दूर कहीं हम चल निकलें,
मन में लेकर प्रीत।
सोंधी मिट्टी की खुशबू,
यादों का आधार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

जुलाई की हर बारिश में,
गूँजे मेघ-मल्हार।
सावन के झूले लेकर,
आए नई बहार।
काग़ज़ की छोटी कश्ती,
सपनों की पतवार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

अगस्त की उस रात कहीं,
मुरली की धुन आए।
राधा-कान्हा की छवि,
निर्मल प्रेम जगाए।
तेरा मेरा प्रेम सदा,
मन का पावन सार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

सितंबर की शाम ढले,
तू बैठे कुछ पास।
मन की हर उलझन कह दूँ,
तू रखना विश्वास।
गणपति के आशीष से,
अपना सुखी संसार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

अक्टूबर की रात सजे,
गूँजे मीठी ताल।
दीप जलें, डांडिया बजे,
मन हो जाए निहाल।
तेरे संग हर एक कदम,
खुशियों की झंकार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

नवंबर के दीप जलें,
घर सारा जगमगाए।
तेरे शुभ कदमों के संग,
सुख आँगन में आए।
तेरी उजली मुसकान ही,
आशा का उजियार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

दिसंबर की अंतिम रात,
कर लें मन की बात।
बीता साल सँजोकर हम,
चल दें फिर से साथ।
आने वाला नया वर्ष,
प्रीत का नव विस्तार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥

बारह मास बदलते जाएँ,
बदले धूप और छाँव।
तू ही मेरा शहर बने,
तू ही प्यारा गाँव।
हर जनम की यही कामना,
तू मेरा संसार बने।
तू जीवन में आ जाए अगर,
हर मौसम त्योहार बने॥
— संतोष कुमार शर्मा
12 घंटे पहले
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