विज्ञापन

इन परिंदों की मैं आवाज उठा लाई हूॅं

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन परिंदों की मैं आवाज उठा लाई हूॅं
        
                                                    
                            
अपने लफ़्ज़ों में मैं कुछ खास उठा लाई हूॅं।

चाह जागी है मुझ में आगे बढ़ने की
उन से सीखी हुई परवाज़ उठा लाई हूॅं

करते रहते हैं वो मेहनत हर पल
उनकी खातिर मैं ये अंदाज उठा लाई हूॅं

क्यों उनकी भूख प्यास की तुम फ़िक्र नहीं करते
मैं इन नादान मासुमों के जज़्बात उठा लाई हूॅं

हम सब ही तो हैं उस करीम रब की मखलूक
खुद में जागे हुए अहसास उठा लाई हूॅं।

हर परिंदा हमें देता है अम़न का पैगाम
अपने रब की दी हुई सौगात उठा लाई हूॅं ।।

 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile