विज्ञापन

वक्त सुहाना लगता

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे होने पर दिन दिन नही लगता।
        
                                                    
                            
वक्त कट जाता वक्त सुहाना लगता।।

कली का शाख पर खिलना लाजमी।
चमन में घूमकर देखा ज़माना लगता।।

जायका जिस्म का खुशबू सबाब की।
ख्वाब में बाहों में सिमट जाना लगता।।

आँखें ऊबती नही अपने ढंग से देखती।
पलक गिराना उठाना लुभावना लगता।।

इतना खोया हुआ 'उपदेश' पहले न था।
सीने से चिपका रहना ख़ज़ाना लगता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
12 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile