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रिश्ते जिन्दगी का हिस्सा मगर जिन्दगी नही

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर स्त्री अपने रिश्ते से बहुत प्यार करती।
        
                                                    
                            
प्यार पाने के लिए अपनी इज़्ज़त खो देती।।

पुरुष पर आँच न आए इसलिए चुप रहती।
अपना ख्याल अपनी बात पीछे छोड़ देती।।

हर बार अपमान सह कर भी रिश्ता निभाती।
रिश्ते निभाते-निभाते अपनी खुशी छोड़ देती।।

शायद ही कोई घर होगा आज के ज़माने में।
जहाँ प्यारी ननदें अपना अधिकार छोड़ देती।।

रिश्ते जिन्दगी का हिस्सा मगर जिन्दगी नही।
फिर भी 'उपदेश' रिश्ते के लिए सब छोड़ देती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
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