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तूने मैंने कैसा किस्मत पाया।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पावन रक्षाबंधन आया।
        
                                                    
                            
याद तुम्हारी दिल में लाया।।

कुसुम कणों से पूछ रही।
बुझा दीप रोशन कर पाया।।

वाणी मूक पड़ी तुम्हारे बिन।
साँसों में संवाद घुला पाया।।

तूँ दूर रहा जग शून्य हुआ।
तूने मैंने कैसा किस्मत पाया।।

तन मन तेरे चरणों में धर दूँ।
संयोग साल में 'उपदेश' पाया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 घंटे पहले
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