यह कैसा बुखार है यों चढ़ने पर उतार नही।
जाँचें पूरी हो गई पर तबियत में सुधार नही।।
मैं समझती रही इसका इलाज आसान होगा।
इश्क दरिया की तरह बहता मगर धार नही।।
बेचैनियों के बीच जीना हमारा कहाँ मुमकिन।
नींद आती नही खुशकिस्मती के आसार नही।।
मेरी तबियत सुधरने के वज़ह और बिगड़ रही।
राहत की कोशिश में 'उपदेश' अभी बहार नही।।
सुकूँ की तलाश में मंजिल तक पहुँच मुश्किल।
हमदर्द को दोषी ठहराने का भी आधार नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'