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बेशकीमती यादो का उफान आता

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुशकिस्मती से सोच आ जाता।
        
                                                    
                            
दिमाग तक लबालब भर जाता।।

तेरे चेहरे पर उँगलियाँ लगाते हुए।
अगाध बोध आने पर सिहर जाता।।

तुम्हीं पहले दर्जे की अमानत रही।
मैं जिसके आँचल में सँवर जाता।।

तुम्हारी बाते ईश्वरीय संदेश जैसी।
आज भी प्रार्थनाओ में सुना जाता।।

तुम्हारे स्पर्श से एक सभ्यता जन्मी।
वही अनुकरण 'उपदेश' किए जाता।।

पेशानी चूमने वाली कोई दुसरी नही।
बेशकीमती यादो का उफान आता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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