प्रेम क्या है..........!!!!
सबसे पहले हम अजनबी होते हैं....
फिर दोस्त बनते हैं, दोस्त से प्रेमी बनते हैं
और फिर ऐसा वक़्त भी आता है जब फिर से अजनबी हो जाते हैं,
जानते है ऐसा क्यों होता है...???
क्योंकि हम प्रेम के सम्बन्ध में भी सिर्फ़ अपने
मतलब को महत्व देते है ना की निस्वार्थत प्यार को,
वो प्रेम ही है जो हमें एक दूसरे की हर ग़लती को
माफ़ करने की शक्ति प्रदान करता है,
जिस किसी से भी हम प्रेम करते है उस से मतभेद होना
कोई बड़ी बात नहीं है, असल में दो भिन्न विचारों के व्यक्ति
ज़्यादा वक़्त तक एक दूसरे को ख़ुशी दे सकते है उनकी तुलना
में जिनके विचार एक-दूसरे से ज़्यादा मिलते हो लेकिन दोनों के
मध्य समर्पण का होना अनिवार्य है,
अक्सर प्रेम के रिश्ते अहम और स्वाभिमान में टूट जाते हैं,
“यदि आप प्रेम करना चाहते हो तो अपना अहम और
स्वाभिमान दोनों को त्याग देना होगा”
ई0 अभिनाश कुमार
सैदपुर,अरवल, बिहार
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