मौसम है सुहाना, बारिश का समां
ऐसे में कितना सुखद हो तेरा आना।
बारिश की फुहारों में,इन मदमस्त बहारों में मन का इठलाना,
ऐसे में कितना सुखद हो तेरा आना।
तेरे प्यार की बरखा में मन भीग-भीग जाए
लेकिन कितना बेपरवाह है कि तू दूर से तरसाए
कैसी नालायक, बेदर्द ये बरखा है
जो तेरी कमी का एहसास दिलाती है।
जैसे ही छू गई एक बूंद मुझे,
लगा तेरे होठों ने छुआ हो मुझे,
ये छुअन और भी तड़पा गई,
मन में एक मीठी सी टीस जगा गई।
ऐ काश ये बरखा फिर आए,
और तू मुझे अपनी बांहों में झुलाए,
हर बूंद में तेरे चुंबन का एहसास हो
भूल जाऊं ये दुनिया गर तू जो मेरे साथ हो।
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