केसरिया रंग थे बिखरे
दूर -दूर तक
रंग-में रंग घुल रहे थे
एक दूसरे में
घुलकर
फिर एक हो गया
अचानक देखा सब एक
धुंधले मटमैले रंग में
मिलकर
हाँ ! साँझ ढल रही थी
धीरे -धीरे
सूरज ढलने के बाद
जब इक्का -दुक्का ही
पंछी बड़े वेग से
अपने घोंसले की सुध लिये
उड़े जा रहे थें
ढलती साँझ की बेला में
इंसानों की बस्ती के पार ॥
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