सच कहूँ तो ,
जीवन में यूँ ही
सबकुछ नही मिलता है
देखो भोर में ही मीलों की
वह तो उड़ान भरता है ,
सिर्फ चार दाने के खातिर ही सही
कितना संघर्ष करता है
और पता नहीं ,
क्या -क्या गुजरता
हरदिन उसपर
कौन जानता है ?
पर हर दिन जीवन से
वह तो लड़ता है
जबकि इंसान
दुःखी ,असहाय ,
हताशा लिये रहता है ,
इसलिये कि शायद
संघर्ष से भय लगता है ॥
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