प्रखर रूप में शासन था,
प्रचण्ड रूप में आसन था,
राजनीति में विशेष थी,
आत्मबल में सर्वश्रेष्ठ थीं,
मनोबल उनका साहसी था,
ह्रदय उनका काशी था,
नित्य रूप में भाषा अचरज,
भव्य रूप में में जैसे गंगा सतलुज,
वो महान वक़्ता थी अपने पथ की,
वो शालिनी थी अपने मन की,
मुख्यमंत्री बन दिल्ली की कहानी बनी,
जहाँ से राजनीति की जुबानी बनी,
सीखा सिखलाया स्त्री की नवीन पहचान बनी,
कौतूहल में सम्मान बनी,
व्यक्ति विशेष में वो महान बनी।,
सुषमा से आग़ाज़ किया,
राजा सा स्वराज किया,
इसीलिए ...
भारत ने उन पर नाज़ किया,
भारत ने उन पर नाज़ किया।।
-सोनू कुमार सक्सेना "सार्थक"
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