आज कल की रात में,जाना है दोस्तो ।
सर को दूर यहाँ से ,जाना है दोस्तो ।।
सर दूर हो या पास ,हरगिज़ न विसारे ।
सर की यादें मन में, आना है दोस्तो ।।
गम में सभी सितारे, उदास प्यारे हैं ।
आँसू गम के छलके,जाना है दोस्तो ।।
जो रात-दिन गुजारे, ना भुलेंगे कभी ।
उन दिनों की याद तो,आना है दोस्तो ।।
सर को फूल मुबारक, गुलदान भरे हैं ।
सर का गीत सभी को,गाना है दोस्तो ।।
सर को नमन हमारा,सभी का नमन है ।
अंकुर सर से कहना,आना है दोस्तो ।।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।