एक निगाह देखने से ,मन में भाव आया है ।
यह कृत है अलौकिक,विश्व सुन्दरी सी काया है ।।
शीशा ढला बदन उसका, चॉदनी के फूलों से ।
चॉद उसका टुकड़ा है, खुशबू उसका साया है ।।
घुँघराले केश काले, गालों पर लटकते हैं ।
लग रहा ज़मी पे,कृष्ण मेघ उतर आया है ।।
उसकी मद भरी निगाहें, मदहोश कर रही हैं ।
ज्यों चुपके-चुुपके आँखों से ज़ाम पिलाया है ।।
खुबसूरत रूप उसका ,यौवन छलक आया है ।
होठलाली अधरों पर ,सूरज ने लगाया है ।।
उर्बशी,अप्सरा से कम नहीं हुश्न में ।
बड़ी फुर्सत में सृष्टि ब्रह्मा ने बनायी है ।।
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