सूरज उगे ला अँगनवा, सबको लाल लागे ला ।
जो ना उठे ला सबेरे,मन को काल लागे ला ।।
जो सुनकर अनसुनी कर दे,करे न कोई काम ।
कहने पर नाराज़ बहुत हो और करत कोहराम ।।
वह तो जागे ना जगाये,बड़ा बवाल लागे ला ।
जो ना उठे ला सबेरे,मन को काल लागे ला ।।
जो भी मैला कपड़ा पहने,बिनु नहाये खात बा ।
ब्रश मंजन भी नहीं करे,पावडर पोत अघात बा ।।
वह तो भाए ना,ना लुभाए,बैताल लागे ला ।
जो ना उठे ला सबेरे,मन को काल लागे ला ।।
जो उठ बिहाने मातृ-पितृ के चरणों का सम्मान ले ।
धन,बल,विद्या,यश बढै व परम पद को जान ले ।।
जो भी जागे ला भुवनवा,माई क लाल लागे ला ।
जो ना उठे ला सबेरे,मन को काल लागे ला ।।
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