तुलसी जैसी माँ है घर आँगन की शोभा ।
खुशबू दहलीजों की,हर चौखट की आभा ।।
हर चौखट की आभा,दरवाजे पर दाबा ।
छाया बरगद की है, घर में काशी काबा ।।
माँ कहती है धन्य है गोस्वामी की हुलसी ।
जिस घर आँगन में हो चौरा पर माँ तुलसी ।।
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