विज्ञापन

लौट के आ-जा

Sandhya tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब से दूर गई है तू
        
                                                    
                            
टूट सी गई हूं मैं
तेरे बिना अधूरी हूं।
तेरे बिन सूनी हर राहें है

न आंखों को अब नींद मिलें
न मन को कोई करार
हर पल तेरा इंतज़ार
हर धड़कन में तेरा प्यार

तू दूर गई तो लगता है
सब कुछ बिखर गया
हसता हुआ मेरा जीवन
जाने कहां ठहर गया

सजे हुए बाजार भी अब
तेरे बिन फीके लगते हैं
त्योहारों के रंग भी जैसे
तेरे बिना अधूरे लगते हैं

हर खुशी में तेरा चेहरा
हर पल तेरी याद
तू जहां भी है लौट के आजा
दिल को बस तुझे आस

झूठे वादे मत करना तू
दिल मेरा तोड़ मत देना
मुझसे यूं दूर जाकर
रिश्ता अपना छोड़ मत देना

तुझसे है मेरा प्यार
तुझसे ही मेरा इकरार है
कैसे शब्दों में कह दूं मैं
तुझे तू ही मेरा संसार

हर पल तेरी कमी सताती है
हर पल तुझे पुकारू
मेरे बच्चे लौट के आजा
मैं तेरी राह निहारु

वादा किया था तूने मुझसे
एक दिन लौट कर आएगी तू
अपने हाथों से खुशियों के फिर नए रंग सजाएगी
बस इस वादे की आस लिए
आज भी खड़ी हूं द्वार पर
लौट के आजा मेरे बच्चे
तुझसे ही मेरा संसार
21 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all