बुद्धि सारी लगाते हैं
कार्य से कैसे बचें
ऐसे मानस का विन्यास
खुदा कैसे हैं रचे
वो कार्य आता ही नहीं
जिससे होती है कमाई
पर आज तक कोइ ताकत
उसे रोक न पाई
-कुँवर संदीप सिंह