घर वालों से धोखा बाहर वालों से ईमान
ऐसा इंसान कैसे करता है खुद पर गुमान
अपनों को छोड़ परायों से खुद को जोड़
समझता इस जग में नहीं उसका कोइ तोड़
समझ दे दे ऐ खुदा ऐसे जुआरी को
जो जमीर को मारे तोड़ ऐसी खुमारी को
-कुँवर संदीप सिंह