हम प्रण करें कि समाप्त करेंगे अपने पर से इस अभिशाप को ,
मिला था जो कभी अहंकारिता व मानव के पाप को ,
क्योंकि करेंगे आज या भविष्य में हम जब कभी भी जातिवादिता का त्याग ,
होगा वही भारत व मानव सभ्यता का स्वर्णिम युग एवं सौभाग्य !
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