एक तेरे- सिवा अब किसी से,
मेरी ज्यादा बात नहीं होती।
हां मिलने के वादे तो जरूर कर लेता हुं, पर
उन वादों पर मुलाक़ात नहीं होती।
मैं औरों के साथ भी समय बिताता फिरता हुं, लेकिन
एक तेरे सिवा किसी और की
यादों में लम्बी रात नहीं होती।
मेरी हर- एक महफ़िल अधुरी है तेरे बिना,
जो तु ना हो तो खुशियों की बरसात नहीं होती।
एक तेरे सिवा अब किसी से ,
मेरी ज्यादा बात नहीं होती ।।
-प्रीति गौतम