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उन्हें कैसे नजर-अंदाज कर पाऊँगा।

Priti Gautam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिनकी नजरों के सामने हर- पल रहता था,
        
                                                    
                            
आज उन्हें कैसे नजर-अंदाज कर पाऊँगा ।
जिनसे हर- रोज़ इजहार करता था,
आज कैसे उनकी बातों से इनकार कर पाऊँगा।
कभी ऐतबार करने की चाह होती थी,
आज कैसे उनसे रुठ पाऊँगा।
जिन पलों को साथ गुजारा है,
मैं कैसे उन लम्हों को भुल पाऊँगा।
चाहता हुं की अब बस वो यादों में ही रहे, लेकिन
मैं कैसे उन यादों से दुर जा पाऊँगा।
जिनकी नजरों के सामने हर- पल रहता था,
आज उन्हें कैसे नजर-अंदाज कर पाऊँगा।।
-प्रीति गौतम
3 घंटे पहले
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