विज्ञापन

बीती यादें

prem bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह पहले तुम चाय लेकर जगाती थी अब तुम्हारे जगाने के वक्त से पहले ही उठ जाता हूंँ,
        
                                                    
                            
छोड़ दी है चाय सुबह की, तुम जो नहीं अब चाय पिलानी वाली बस पानी से काम चलाता हूंँ,
तुम पूछती हो अब क्यों योग-ध्यान में बैठते हो, फिर सुबह-सुबह ही नहा लेते हो,
जब तुम थी तब मन शांत था अब मन को शांत करने को योग-साधना करता हूंँ,
नहा कर फिर पाठ-पूजा करके तुम्हारी तस्वीर के सामने भी दिया जलाता हूंँ, ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति दे यही अरदास दोहराता हूँ
और हां अब तो अपना गीला तौलिया भी खुद उठाता हूंनं और अपना बिस्तर भी झाड़कर खुद लगाता हूंँ,
कोई नाज़-नख़रा नहीं करता अब मैं, न ही कोई फरमाईश करता हूंँ जो भी बने जिस वक्त भी बने चुपचाप खुश होकर खा लेता हूंँ,
तुम्हारी छोटी-छोटी गलतियों पर किया करता था गुस्सा मगर अब कोई बड़े से बड़ा भी नुक्सान कर दे मेरा, किसी पर भी नहीं चिल्लाता हूंँ,
किस पर चिल्लाऊं भला अब, अब ज़िन्दगी के मायने भी तो बहुत बदल गए हैं,
दस मिनट भी चलाता था मोबाईल तो तुम्हें मेरा मोबाईल सौतन नज़र आने लगता था, अब घण्टों मोबाईल से जी बहलाता हूंँ,
थक जाती हैं जब आंखें पलकें मूंदकर तुम्हारे होने का दिल को एहसास दिलाता हूंँ,
लेकिन सोचकर एक बात मैं हर पल पछताता हूंँ, मैं ऐसा पहले क्यों न बन सका जैसा मैं अब बन गया हूं,
अनमोल वक्त को क्यों अपनी ईगो के लिए छोटी-मोटी नोंक-झोंक में गंवा दिया,
काश छोड़ ईगो उतना वक्त खुशी से तुम संग बिताता मैं, जितना वक्त ईश्वर ने साथ का दिया,
तुम दूर हो, अदृश्य हो, छू नहीं सकती मुझे, चलो दूर से ही सही देकर थपकी अब सुला दो मुझे,
थक गया हूंँ बहुत अब सदा के लिए चैन की नींद सोना चाहता हूँ, हो तुम जहां मैं भी उस दुनिया का होना चाहता हूंँ।
-प्रेम बजाज
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile