सौभाग्य की अंजुलि में नेह व संरक्षण
जग को भाता भाई बहन का स्नेहिल बंधन
संग बीता बचपन स्मृति यह सुखद सुहावन
भाई अक्षत है यह शुभेच्छा का मंगलमय हो जीवन
रोली, तिलक के शुभत्व का सम्बंध यह शाश्वत है
सत्त प्रीत के संकल्प की आस्था यह अनवरत है
श्रद्धा की डोर से भीगा भीगा बंधा मन
स्वागत आया रेशम रेशम पावन रक्षाबंधन
- प्रीति सिंह
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