आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अटूट बंधन

                
                                                         
                            सौभाग्य की अंजुलि में नेह व संरक्षण
                                                                 
                            
जग को भाता भाई बहन का स्नेहिल बंधन
संग बीता बचपन स्मृति यह सुखद सुहावन
भाई अक्षत है यह शुभेच्छा का मंगलमय हो जीवन
रोली, तिलक के शुभत्व का सम्बंध यह शाश्वत है
सत्त प्रीत के संकल्प की आस्था यह अनवरत है
श्रद्धा की डोर से भीगा भीगा बंधा मन
स्वागत आया रेशम रेशम पावन रक्षाबंधन

- प्रीति सिंह

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर