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चाशनी

Pradeepti Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं जल तुम शक्कर
        
                                                    
                            
दोनों एक दूजे में घुलना चाहें
मगर प्रेम की चाशनी बनेगी कैसे 
अगर हम ताप से ही बचना चाहें 
कुछ हुलचल होगी ज़रूर
बुलबुलें बनेंगे सैकड़ो
बदलेंगे रूप दोनों के
घुलेंगे जब एक दूजे में 
तैयार होगा ये प्रेम रस
एक नया रंग लिए
बनके सौगात समर्पण की
जल का शक्कर और
शक्कर का जल के लिए |

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5 वर्ष पहले
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