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चाशनी

                
                                                         
                            मैं जल तुम शक्कर
                                                                 
                            
दोनों एक दूजे में घुलना चाहें
मगर प्रेम की चाशनी बनेगी कैसे 
अगर हम ताप से ही बचना चाहें 
कुछ हुलचल होगी ज़रूर
बुलबुलें बनेंगे सैकड़ो
बदलेंगे रूप दोनों के
घुलेंगे जब एक दूजे में 
तैयार होगा ये प्रेम रस
एक नया रंग लिए
बनके सौगात समर्पण की
जल का शक्कर और
शक्कर का जल के लिए |

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5 वर्ष पहले

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