विज्ञापन

शोख़ बहारों की महफ़िल में शाइर-गर मस्ताना हो

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शोख़ बहारों की महफ़िल में शाइर-गर मस्ताना हो
        
                                                    
                            
ज़ाम गज़ल गीतों के हो ए'जाज-ए-सुखन पैमाना हो

गीत गज़ल नज़्मों की यारो वां बारिश ऐसे बरसे
लय सुर ताल की थाप पे उस रमता-झुमता परवाना हो

इश्क़ है मज़हब और खुदाई बाकी झूठ के धन्धे हैं
इश्क़ की गलियों में बस अपना हर दिन आना जाना हो

मस्त कलंदर बैरागी हूॅं इश्क़ का सच्चा शैदाई
प्यार का ज़ाम पिला दूं कोई पीने वाला दीवाना हो

यैसी लगन है लागी मोहे सुध बुध सब बिसराई है
अब तो बृज की गलियन में ही अपना आब-ओ-दाना हो

प्यार की नगरी में भी अपना सुन्दर सा हो एक महल
भंवरे कलियां ख़ुशबू तितली और वां पे मयखाना हो

'दीप' जले रातों में टिम-टिम देख सितारे शर्माएं
प्यार की राहों में रोशन तेरा-मेरा अफसाना हो।।
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
9 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile