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भारत की वीरांगनाएं

PANKAJ SRIVASTAVA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बांध वंश को पीठ पर
        
                                                    
                            
दांतो से कमान संभॉली थी
लेकर तलवार दोनो हाथो में
झांसी की रानी युध्द करने उतरी थी ।
नाको चने चबाने को
अंगे्जो की खाल उतारने को
वो मर्दानी मैदान मे दौड़ी थी
भारत को स्वतन्त्र करने को
लक्ष्मीबाई युध्द लड़ने उतरी थी ॥

रानी संग जौहर करने को
हजारो वीरांगनाएं भी साथ आयी थी
राख भी हाथ न लगा दरिंदो को
ऐैसी ज्वाला भड़काई थी।
चित्तौण का मान रखने को
खिलजी का गुरुर तोड़ने को
जिन्दा ही चिता पर जली थी
रानी पद्मावती अपने संग
भारत मॉ कि लाज बचाई थी ॥

तलवारो की भीषण टंकारो में भी
दुर्गावती की हुँकार सुनाई देता था
रणभूमि के चारो कोने मे
रानी का पराक्रम दिखाई देता था।
बाजबहादुर जैसे शाशको को
कइयों बार धुल चटाई थी
रानी ने अपने युद्ध कौशल से
मुगलो की नींव हीलाई थी॥

शादी की मेंहदी हाथों से मिटी भी न थी
शीश काटकर चुण्डावत को भेजवाया था
मोह खुद से भंग करने को
पति को विजय श्री दिलाने को
हाड़ी रानी ने अन्तिम निशानी भेजा था ।
माला पहन कर शीश की
चुण्डावत ने हाहाकार मचाया था
औरंगजेब के सैनिको के टुकडे़ टुकडे़ कर
मुगलो को उनकी हद्द समझाया था॥

कोटी कोटी नमन करता हुँ
भारत कि उन वीरांगनाओ को
जिन्होने ने जान न्यौछावर किया
देश कि मान बचाने को ॥

- पंकज कुमार श्रीवास्तव
2 वर्ष पहले
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