जब निकली थीं म्यान से तलवारें,
पहले खनकती थीं अपनी दीवारें।
अपनों ने ही अपनों का खूं बहाया,
बयाँ करें कहानी रक्त रंजित दीवारें।
चंद्र दत्त शर्मा।