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तुम्हारे ख़ातिर

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कसम है तुम्हारी हम ये ज़ाम छोड़ देंगे
        
                                                    
                            
तुम्हारे ख़ातिर जैसे हर शाम छोड़ देंगे

हमारी जिंदगी में आकर दखल तो दो
ये बाकी ज़िंदगी तुम्हारे नाम छोड़ देंगे

वैसे भी हमें कोई शौक नहीं तुम्हारे सिवा
गर मिल जाये सनम तो हर दाम छोड़ देंगे

ना राहों की फ़िक्र है ना मंज़िल का ग़म
बात गर प्यार की है हर मुकाम छोड़ देंगे

कभी घाले तो सही आकर चोली,दामन को
फिर चांद होगा चांद पे हम गांव छोड़ देंगे
-नीटू मावी
13 घंटे पहले
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