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तुम्हारे ख़ातिर

                
                                                         
                            कसम है तुम्हारी हम ये ज़ाम छोड़ देंगे
                                                                 
                            
तुम्हारे ख़ातिर जैसे हर शाम छोड़ देंगे

हमारी जिंदगी में आकर दखल तो दो
ये बाकी ज़िंदगी तुम्हारे नाम छोड़ देंगे

वैसे भी हमें कोई शौक नहीं तुम्हारे सिवा
गर मिल जाये सनम तो हर दाम छोड़ देंगे

ना राहों की फ़िक्र है ना मंज़िल का ग़म
बात गर प्यार की है हर मुकाम छोड़ देंगे

कभी घाले तो सही आकर चोली,दामन को
फिर चांद होगा चांद पे हम गांव छोड़ देंगे
-नीटू मावी
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11 घंटे पहले

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