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जबतक हमारे सांसों की सरगम बजती है

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जबतक हमारे सांसों की सरगम बजती है
        
                                                    
                            
तबतक ही ज़िन्दगी नर्तन-गायन करती है!
आख़िर सांसों का खज़ाना खाली होनेपर
हयात हमारी दुनिया से पलायन करती है!
-एन. आर. कस्वाँ
7 घंटे पहले
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