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जबतक हमारे सांसों की सरगम बजती है

                
                                                         
                            जबतक हमारे सांसों की सरगम बजती है
                                                                 
                            
तबतक ही ज़िन्दगी नर्तन-गायन करती है!
आख़िर सांसों का खज़ाना खाली होनेपर
हयात हमारी दुनिया से पलायन करती है!
-एन. आर. कस्वाँ
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2 घंटे पहले

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