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बढ़ता बोझ

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घटने लगा है
        
                                                    
                            
जोश धमनियों का
लड़खड़ाने लगे हैं
पाँव हर कदम पर

फैलने लगा है
ज़हर सहानुभूतियों का
बढ़ने लगा है
बोझ नाकामियों का।

मं शर्मा (रज़ा)
22 घंटे पहले
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