जन जन में छाई है मस्ती
सतरंगी बना गई बस्ती
रंगों में लिपटी हर काया
ऋतु बसंत मादकता लाया
हर्ष उल्लास से भरा है मन
रंगों से सरोबार है तन
रंगों से हर चेहरा लाल
बहकी हुई है सबकी चाल
समभाव का पर्व है होली
भेद भाव रंगों से धो ली