विज्ञापन

भोर हुई

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्निग्ध, शांत, शीतल बिन शोर,
        
                                                    
                            
जागो मानुस हो गयी भोर।
गौरैया कलरव करें जोर,
मैना गाए भाव विभोर,
खुशी से नाचे वन का मोर।
जागो मन ईश, हो गयी भोर।

उर्जा से भर गयी प्रकृति,
दुल्हन सी सज गयी है धरती,
किरणों का आलिंगन चहुंओर,
जागो पुलकित हो गयी भोर।

मंद मंद पवन का झोंका,
किसी की आहट, या है धोखा,
हर्षित नीर है, या चितचोर,
जागो कोमल हो गयी भोर।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6915 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

674 कविताएं

View Profile

Raghav Dixit

41 कविताएं

View Profile