स्निग्ध, शांत, शीतल बिन शोर,
जागो मानुस हो गयी भोर।
गौरैया कलरव करें जोर,
मैना गाए भाव विभोर,
खुशी से नाचे वन का मोर।
जागो मन ईश, हो गयी भोर।
उर्जा से भर गयी प्रकृति,
दुल्हन सी सज गयी है धरती,
किरणों का आलिंगन चहुंओर,
जागो पुलकित हो गयी भोर।
मंद मंद पवन का झोंका,
किसी की आहट, या है धोखा,
हर्षित नीर है, या चितचोर,
जागो कोमल हो गयी भोर।