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ख़ुशी के मोती: दोहे

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम जख्मों के समंदर से खुशी के मोती चुरा लेते हैं।
        
                                                    
                            
दुनिया क्या हमें समझाएगी,कि खुश कैसे होते हैं।।

हमें बने बनाए आसान राह नहीं फबते है।
हम खुद के बनाएं नियम,वसूलों पे चलते है।।

हमें नहीं पता किस्मत के भरोसे कैसे बैठते है।
किस्मत को भी मेहनत के बदौलत बदल देते हैं।।

लोग बैठ के दूसरों में कमियां ढूंढते हैं।
हम बड़े शिद्दत से अपनी कमियों को निहार लेते हैं।।

राहों के बाधाओं से हम नहीं घबराते हैं।
पत्थर को भी तिनके समझकर टाल देते हैं।।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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