अलमारी में रखी उस डायरी में,
उसमें लिखी एक शायरी में,
महक गुलाब की आज भी ज़िंदा है।
वो पत्तियां अब सूख गईं,
ख़्वाहिशें भी रूठ गईं
,मेरी वफ़ा पे तेरी बेवफ़ाई शर्मिंदा है!