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तिनके तिनके से संसार बनाया है

kalu ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उड़ रहे थे बिखरे तिनके इस संसार में इधर-उधर
        
                                                    
                            
,खोज रहे थे नन्हे पंछी अपने सपनों का सुंदर घर।
चारों ओर पसरी थीं सूनी पेड़ों की शाखें सूखी,
मौसम की मार झेलकर जो खड़ी थीं मौन और रूखी।
तब जागा मन में एक हौसला, पंखों ने उड़ान भरी,
तिनका-तिनका जोड़कर उन्होंने अपनी तकदीर हरी।
लाकर चोंच में सूखी घास और कोमल सी कोई डाल,
बुन दिया महलों से सुंदर सपनों का संसार विशाल।
इन नन्हें जाबाज़ों ने जो हुनर कमाल का दिखाया है,
इंसानी कारीगरी को भी पल भर में बौना बनाया है।
बारीक बुनावट देखकर इसकी दुनिया भी हैरान है,
कहती है यह मकड़ी का जाला है, पर यह तो उनका अरमान है।
कुदरत की इस सुनहरी कला को शत-शत नमन हमारा है,
जिसने इस छोटी सी जान में इतना साहस उबारा है।
हम इंसानों ने तो केवल फूलों से दुल्हन को सजाया है,
इन पंछियों ने तो घोंसलों से पूरे पेड़ को दुल्हन बनाया है।श्रम और निष्ठा का यह कैसा अनुपम उपहार दिया,
उजड़ी हुई सी उन शाखों को जीवन का शृंगार दिया।
सीख यही देती है हमको इन नन्हे जीवों की टोली,
मेहनत से ही सज सकती है हर सूनी और खाली झोली

 
8 घंटे पहले
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