विज्ञापन

दोस्तों के नाम

Jay shah

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            Dosti Ko kisi ki Nazar nahi lagti ,
        
                                                    
                            
Dil me basi yado ki kabhi aakhri tarikh nahi Hoti ,
Dosti koi kya btaye yaro ,
Dhadkano se kabhi koi fariyad nahi Hoti .......

Js



- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile