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सफलता

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सहन करना सीखो, जीवन का सार है,
        
                                                    
                            
हममें भी कमियाँ हैं, दूसरा सहता हजार है।

तन और मन का जब, संतुलन बनता है,
तभी तो जीवन में, सफलता मिलता है।

जो संतुलन खो देता, वही हार जाता है,
जो धीरज रखता है, वही पार जाता है।

बदले की भावना, मन में मत रखना,
खराब फल खुद ही, डाल से गिर पड़ता।

सफलता को सब, पाना तो चाहते हैं,
परिश्रम सभी, दिन-रात करते हैं।

पर सफलता इतनी, सहज नहीं मिलती,
कई बार कोशिशें, यूं ही बिखर जातीं।

असफल जो होते, दो राह अपनाते हैं,
कोई बहाने ढूंढता, समय गँवाते हैं।

कोई गलती को अपनी, सुधार लेता है,
वही शिखर पर, चढ़कर दिखाता है।

इसलिए बहाना नहीं, सुधार जरूरी है,
तभी तो जीवन में, जीत पूरी है।

-- जगदीश प्रसाद शर्मा, दिल्ली
स्वरचित मौलिक रचना
9 घंटे पहले
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