विज्ञापन

कितनी संजीदगी से लेखनी मेरी संवरने लगी

Gurjeet Kaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी याद में शब्द मोती से पन्नों पर बिखर गये
        
                                                    
                            
रोज़ नये मोतियों से किताब मेरी सजने लगी
आंसू भी स्याही बन काग़ज़ रंगीन करते गये
मन की भावनाएँ ज्यों पन्नों पर उतरने लगीं
भावों में डूबकर जब यूँ ही हम लिखते गये
कितनी संजीदगी से लेखनी मेरी संवरने लगी
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1636 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13438 कविताएं

View Profile