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कितनी संजीदगी से लेखनी मेरी संवरने लगी

                
                                                         
                            तेरी याद में शब्द मोती से पन्नों पर बिखर गये
                                                                 
                            
रोज़ नये मोतियों से किताब मेरी सजने लगी
आंसू भी स्याही बन काग़ज़ रंगीन करते गये
मन की भावनाएँ ज्यों पन्नों पर उतरने लगीं
भावों में डूबकर जब यूँ ही हम लिखते गये
कितनी संजीदगी से लेखनी मेरी संवरने लगी
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3 घंटे पहले

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