आज तम्मना रोई है
शायद दिल की किताब
खोई है
क्या था उस किताब में
कुछ जवाब न दे पाई है
आज तम्मना रोई है.
वर्षो का इन्तिज़ार और
कुछ अधूरे ख़्वाबों पर इख़्तियार
आज जार जार कोई है
आज तम्मना रोई है.
कुछ पन्नो पर अतीत की
रहनुमाई है
शायद दिल की किताब
खोई है
कुछ वफ़ा , कुछ जफा
और अधूरी मुरादों की
साफगोई है
आज तम्मना रोई है
शायद दिल की किताब
खोई है
-अनिता गोस्वामी