आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शायद दिल की किताब

                
                                                         
                            आज तम्मना रोई है
                                                                 
                            
शायद दिल की किताब
खोई है
क्या था उस किताब में
कुछ जवाब न दे पाई है
आज तम्मना रोई है.
वर्षो का इन्तिज़ार और
कुछ अधूरे ख़्वाबों पर इख़्तियार
आज जार जार कोई है
आज तम्मना रोई है.
कुछ पन्नो पर अतीत की
रहनुमाई है
शायद दिल की किताब
खोई है
कुछ वफ़ा , कुछ जफा
और अधूरी मुरादों की
साफगोई है
आज तम्मना रोई है
शायद दिल की किताब
खोई है
-अनिता गोस्वामी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर