विज्ञापन

मेरा क्या कसूर है

Dn Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारी निगाहें तो झुकी झुकी सी है पर साफ साफ दिख रही है तेरी शोखियां,
        
                                                    
                            
दबी दबी सी तेरी हंसी है पर मेरे अंदर बिखर रही है बिजलियां,
नशे में चूर चूर है तुम्हारा शबाब है सनम,
पर अगर मेरा दिल मचल गया है तो मेरा क्या कसूर है सनम,
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all