तुम्हारी निगाहें तो झुकी झुकी सी है पर साफ साफ दिख रही है तेरी शोखियां,
दबी दबी सी तेरी हंसी है पर मेरे अंदर बिखर रही है बिजलियां,
नशे में चूर चूर है तुम्हारा शबाब है सनम,
पर अगर मेरा दिल मचल गया है तो मेरा क्या कसूर है सनम,
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